महाराष्ट्र

नेरुल हॉस्टल में हिंदू मूर्तियों को अपवित्र करने का आरोप, ईसाई नर्स के खिलाफ FIR

Kavita2
10 Jun 2026 11:35 AM IST
नेरुल हॉस्टल में हिंदू मूर्तियों को अपवित्र करने का आरोप, ईसाई नर्स के खिलाफ FIR
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Maharashtra महाराष्ट्र: नवी मुंबई के नेरुल इलाके में एक विवादित घटना सामने आई है, जिसमें एक ईसाई नर्स पर हिंदू मूर्तियों को जानबूझकर अपवित्र करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता हर्षला पाटिल ने हिंदू जनजागृति समिति (HJS) से संपर्क करने के बाद नेरुल पुलिस ने इंडियन पीनल कोड (IPC), 2023 की धारा 298 और 351(2) के तहत FIR दर्ज की है।

पाटिल ने पुलिस को बताया कि वह नेरुल के एक हॉस्टल में रहती हैं और अपने कमरे में एक छोटा सा मंदिर बनाती हैं। मंदिर में उन्होंने गणेश जी और राधा-कृष्ण की मूर्तियां रखी थीं और नियमित रूप से पूजा करती थीं। मई 2026 के अंत में हॉस्टल में रहने आई आरोपी नर्स ने मंदिर को लेकर विरोध शुरू कर दिया।

शिकायत में कहा गया है कि आरोपी नर्स बार-बार मंदिर के बारे में हर्षला से बहस करती थी और पूजा सामग्री को छूने तथा मूर्तियों को अपवित्र करने का प्रयास करती थी। पाटिल का कहना है कि नर्स की इस हरकत से उन्हें मानसिक परेशानी और डर का सामना करना पड़ा।

हिंदू जनजागृति समिति के प्रतिनिधियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को शिकायत दर्ज करने के लिए कहा। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आरोपी नर्स को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की पूरी तरह जांच की जाएगी और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय निवासी और हॉस्टल के अन्य छात्रों ने बताया कि यह घटना हॉस्टल में शांति और सुरक्षा को प्रभावित कर सकती थी। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था का सम्मान होना चाहिए और किसी को भी दूसरों की पूजा या धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

वर्तमान में पुलिस आरोपी की पहचान और उसके कृत्यों की पुष्टि कर रही है। साथ ही, हॉस्टल प्रशासन से भी रिपोर्ट मांगी गई है कि इस घटना के दौरान कौन-कौन से लोग मौजूद थे और किस प्रकार की गतिविधियां हुईं।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों या मूर्तियों के अपवित्र होने के आरोप संवेदनशील मामलों में आते हैं, और ऐसे मामलों में सावधानीपूर्वक और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होती है। इस तरह के विवाद से न केवल व्यक्तिगत आस्था प्रभावित होती है, बल्कि सामाजिक माहौल पर भी असर पड़ता है।

हर्षला पाटिल ने कहा कि उनका मकसद केवल अपनी पूजा की स्वतंत्रता और धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा करना है। उन्होंने बताया कि अब वह कानून के तहत न्याय की उम्मीद करती हैं और समाज में शांति और सहिष्णुता बनी रहे।

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